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क्या ओपन सोर्स डिज़िटल इंडिया की सबसे ख़ास रणनीति है?

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क्या ओपन सोर्स डिज़िटल इंडिया की सबसे ख़ास रणनीति है?

डिज़िटल इंडिया की सबसे ख़ास रणनीति अलग-अलग व्यक्तियों की नज़र में अलग-अलग हो सकती है, लेकिन मेरी दृष्टि में डिज़िटल इंडिया की सबसे ख़ास रणनीति ओपन सोर्स से संबंधित वे नीतियाँ हैं जिन्हें भारत सरकार ने पिछले साल जारी किया था। पिछले साल भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ओपन सोर्स से संबंधित तीन नीतियाँ जारी की हैं। ये नीतियाँ काफी व्यापक हैं और एक तरह से गेम चेंजर हैं और भारत के समग्र विकास के लिए काफी मददगार साबित होने वाली हैं। मुझे ताज्जुब होता है कि क्यों डिज़िटल इंडिया का यह पहलू अधिक चर्चा का विषय नहीं बन सका है।

1.भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के अंगीकरण की नीति

जारी की गई नीतियों में सबसे ख़ास नीति है भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के अंगीकरण की नीति। आप शायद जानते हों कि सूचना प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय नीति 2012 में अपने लक्ष्य के रूप में “खुले मानकों के अंगीकरण और ओपन सोर्स एवं ओपन प्रौद्योगिकी का प्रचार-प्रसार" का ज़िक्र किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय नीति के संदर्भ में ही “ भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के अंगीकरण की नीति ” को जारी किया है ताकि सरकारी संगठनों में ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के औपचारिक उपयोग को बढ़ावा मिल सके। इ-गवर्नेंस ऐप्लीकेशन व प्रणाली में रणनीतिक नियंत्रण को पक्का करने के साथ स्वामित्व की सकल लागत और ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के अंगीकरण के लिए ढाँचा परिभाषित करना इस नीति का केंद्रीय लक्ष्य है। ई-गवर्नेंस प्रणाली के लिए ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के अंगीकरण के लिए ढाँचा तैयार किया जा चुका है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है, "भारत सरकार सभी इ-गवर्नेंस सिस्टम में ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर लगाने के लिए कोशिश क्लोज्ड सोर्स सॉफ़्टवेयर के बनिस्बत वरीय रूप से करेगी। इसमें कहा गया है, "सॉफ़्टवेयर में अध्ययन और बदलाव तथा मूल और रूपांतरित सॉफ़्टवेयर की कॉपी के पुनर्वितरण के लिए स्रोत कोड समुदाय /एडोप्टर/अंतिम उपयोगकर्ता के लिए उपलब्ध रहेगा।" इसके अवाले इसमें कहा गया है कि, "स्रोत कोड किसी प्रकार की रोयाल्टी से भी मुक्त होगी।" पूरी दुनिया के ओपन सोर्स के समर्थक इस बात से बेशक खुश होंगे कि इस नीति के अनुपालन की प्रकृति अनिवार्य है। और इसमें कोई शक नहीं कि ओपन सोर्स का चुनाव ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर की मेरिट के कारण हुआ है।

2. सरकारी अनुप्रयोगों के स्रोत कोड की मुक्ति से सहभागी अनुप्रयोग विकास की नीति

ओपन सोर्स दर्शन से संबंधित एक और महत्वपूर्ण नीति। सरकारी अनुप्रयोगों के स्रोत कोड की मुक्ति के द्वारा सहभागी अनुप्रयोग विकास की नीति गिटहब और सोर्सफोर्ज की तर्ज पर ओपन सोर्स विकास मॉडल अपनाकर इ-गवर्नेंस की गति को बढ़ाने के लिए लाई गई है। इस नीति के तहत, भारत सरकार मौजूदा विकसित अनुप्रयोगों के कई जगहों पर उपयोग को बढ़ावा देना चाहती है। स्रोत कोड खोलकर, भारत सरकार सफल, व्यापक और उच्च गुणवत्ता वाले इ-गवर्नेंस अनुप्रयोग को सहभागी तरीके से विकसित करना चाहती है। यह साथ ही रचनात्मकता को प्रोत्साहन देने के लिए नए अनुप्रयोगों को विकसित करना चाहती है – सरकारी विभागों और निजी संगठनों, नागरिकों और डेवलपरों के बीच सहभागी विकास को प्रोत्साहित कर ताकि नए इ-गवर्नेंस अनुप्रयोग और सॉल्यूशंस तैयार किए जा सकें। सार्वजनिक रूप से अनुप्रयोग स्रोत कोड के उपयोग और रिलीज को सार्वजनिक करके लागत और विकास में लगने वाले समय को काफी कम किया जा सकता है और पारदर्शिता और मास पीयर रिव्यू के द्वारा कुल गुणवत्ता और सुरक्षा में काफी बढ़ोतरी होती है। सहभागी अनुप्रयोग विकास प्लैटफ़ॉर्म को तैयार किया जा रहा है।

3. भारत सरकार के लिए ओपन ऐप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) की नीति

डिज़िटल इंडिया के व्यापक दृष्टिकोण के अंतर्गत, भारत सरकार सारी डिज़िटल सेवाओं को वेब, मोबाइल और कॉमन सर्विस डिलिवरी केंद्रों के द्वारा नागरिकों को उपलब्ध कराना चाह रही है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, डेटा, ऐप्लीकेशन और प्रक्रिया के ऐसे पारितंत्र की जरूरत होगी जो एक-दूसरे से संवाद कर सके ताकि सही समय पर सही उपयोगकर्ताओं के लिए सही सूचना उपलब्ध कराई जा सके। सॉफ़्टवेयर इंटरऑपरेबिलिटी के लिए खुले मानकों के प्रोत्साहन के लिए, भारत सरकार ने पहले ही “इ-गवर्नेंस के लिए खुले मानकों की नीति ” और “इ-गवर्नेंस के लिए इंटरऑपरेबिलिटी फ्रेमवर्क के लिए प्रौद्योगिकी मानक ” जारी कर दिया है। “खुली सरकार यानी ओपन गवर्नमेंट ” पर विश्वव्यापी पहल सरकारी संगठनों के द्वारा जमा सूचना की सुगम प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करता है। इस नीति के तहत सरकारी संगठनों में ओपन APIs के औपचारिक उपयोग को बढ़ावा देना है।

भारत में ओपन सोर्स को लेकर कई काम किए गए हैं लेकिन पहली बार सरकार ने दिशानिर्देश के तौर पर मजबूत और व्यापक नीतियाँ जारी की हैं। इन नीतियों के कार्यान्वयन पर काम चालू हो चुका है और हमें आशा है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों की तरह ओपन सोर्स भारत में डिज़िटल खाई को पाटने में बड़े पैमाने पर मददगार होगी।

राजेश रंजन के बारे में

राजेश रंजन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिविजन के लिए ओपन सोर्स कम्युनिटी मैनेजर के तौर पर काम कर रहे हैं। इससे पहले वे रेड हैट, लिटरेट वर्ल्ड इंक., और इंडियन एक्सप्रेस समूह के लिए काम कर चुके हैं। वे फ्यूल प्रोजेक्ट के संस्थापक हैं और मोज़िला, फेडोरा, लिब्रेऑफिस, गनोम, केडीई आदि कई ओपन सोर्स प्रोजेक्ट जुड़े हैं। उन्हें आप ट्विटर पर @kajha पर फ़ॉलो कर सकते हैं।